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Editorial: PC Plus Ltd., 2025

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N° de ref. del artículo L2-9781998027255
- Título
- ??????? ????????? ?????? ???? ???-????? ?and#235
- Editorial
- PC Plus Ltd.
- Año de publicación
- 2025
- Estado
- New
- Encuadernación
- HRD
- ISBN 10
- 1998027252
- ISBN 13
- 9781998027255
- Peso del artículo
- 476 gramos
भारतीय साहित्य परम्परा में आख्यान एक अत्यंत समृद्ध और लोकप्रिय विधा है , जो आख्यानों पर लोककथाओं और लोक परंपराओं का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। भारतीय आख्यान परंपरा में राम और ष्ण के दो मुख्य अवतारों की कल्पना व्यापक रूप से विद्यमान रही है, जिनके आदर्श चरित्रों को आधार बनाकर भारतीय वाङ्मय में अत्यधिक काव्य सर्जना हुई है। विभिन्न पंथों और संप्रदायों के संतकवियों ने भी इस परंपरा को समृद्ध किया है। राजस्थान की भूमि पर विक्रम की सोलहवीं शताब्दी में गुरु जाम्भोजी द्वारा प्रवर्तित विश्नोई पंथ में भी पौराणिक आख्यानों पर आधारित संत साहित्य की सृजन परंपरा ष्टिगत होती है। प्रस्तुत पुस्तक में गुरु जाम्भोजी का संक्षिप्त जीवनवृत्त, धार्मिक ष्टिकोण तथा राम और ष्ण अवतारों के प्रति उनकी मान्यताओं का उल्लेख किया गया है। पुस्तक में विश्नोई पंथ के सात प्रमुख संतकवियों मेहोजी गोदारा, सुरजनदास पूनिया, पद्म भगत, रामलला, केसौदास गोदारा, डेल्हजी एवं ऊदोजी अड़ींगकी दस रचनाओं का उपजीव्य ग्रंथों के आलोक में विवेचनात्मक अध्ययन किया गया है। मेहोजी गोदारा की रामायण, सुरजनदास पूनिया की रामरासौ, तथा पद्म भगत व रामलला की रुक्मिणी मंगल में राम और कृष्ण की भक्तिमय लोकाभिमुख छवियाँ उभरती हैं। केसौदास की कथा बहसोंवनी, भींव दुसासणी और कथा स्वर्गारोहिणी में श्रीकृष्ण का प्रभावशाली चित्रण मिलता है, जबकि सुरजनदास की कथा उषा पुराण तथा डेल्हजी की कथा अहमंनी कृश्ण भक्ति परंपरा को नवीन अर्थवत्ता प्रदान करती हैं। विशेष रूप से हिंदी भक्ति काव्य की भ्रमरगीत परंपरा में संतकवि ऊदोजी अड़ींग की सनेहलीला का समीक्षात्मक विश्लेषण इस ग्रंथ का एक महत्त्वपूर्ण अवदान है।
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