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मैं बिहार हूँ: जहाँ बुद्ध जन्मे वही भूख क्यों? - Tapa dura

आदित्या आनंद केशव

 
9798903191505: मैं बिहार हूँ: जहाँ बुद्ध जन्मे वही भूख क्यों?

Sinopsis

क्या आपने कभी किसी मिट्टी को बोलते हुए सुना है? क्या आपने कभी किसी राज्य का दर्द महसूस किया है? “मैं बिहार हूँ: जहाँ बुद्ध जन्मे वही भूख क्यों” केवल एक किताब नहीं है, यह बिहार की अपनी आवाज़ है। इस पुस्तक के माध्यम से बिहार खुद आपसे बात करता है, अपनी कहानी सुनाता है, अपने घाव दिखाता है, और अपने सपनों की बात करता है। यह किताब आपको इतिहास की किताबों वाला बिहार नहीं दिखाती, बल्कि वह बिहार दिखाती है जो अपने बच्चों को बड़े सपने देते हुए भी उन्हें घर से दूर जाते हुए देखता है। यह वही बिहार है जो कभी ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता की रोशनी था, और आज अपने ही लोगों के पलायन, संघर्ष और दर्द को महसूस करता है। इस किताब में आपको लगेगा जैसे बिहार खुद आपके सामने बैठा है और कह रहा है कि उसने क्या खोया, क्या सहा और अभी भी किस उम्मीद पर खड़ा है। इसमें माँ के आँसू हैं, मजदूर के पसीने की गंध है, युवाओं के टूटते सपने हैं, और फिर भी जीने की जिद है। यह किताब शिकायत भी है, सवाल भी है, और उम्मीद भी। यह बिहार का अपने देश से संवाद है, अपने लोगों से बात है, और आने वाले कल के लिए एक पुकार है। जब आप इस किताब को पढ़ेंगे, तो आपको लगेगा कि आप सिर्फ शब्द नहीं पढ़ रहे, बल्कि बिहार खुद आपको अपनी कहानी सुना रहा है।

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