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ख़तो किताबत यूं भी लफ्ज़ों में कैद लम्हे - Tapa blanda

Jaspal

 
9798900816739: ख़तो किताबत यूं भी लफ्ज़ों में कैद लम्हे

Sinopsis

उन उमरदराज जोड़ों के नाम जो अपने जोड़ीदार खो चुके हैं । हरदम आँखें नम लिए नहीं घूमते पर दिल मे एक कमी छुपाये जीते हैं ।शब्द मेरे हैं पर अकेलापन- अपने प्यारों के साथ होने पर भी जो उदासी यकायक छा जाए,या फिर कभी यू ही हँसते हँसते आँखों से नमी छलक उठे.......... । वो सब इन लफ्जों को महसूस कर सकेंगे।सत्तर के दशक में पाँव रख चुके उन अकेलों की जुबान है ये खतो- किताबत ।

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Acerca del autor

जसपाल कौर - हिंदी साहित्य में एम.ए, शिक्षिका, आध्यात्मिक अभ्यास,रेकी मास्टर,आकाशिक रीडर,सभी का समन्वय काव्य रूप में,लेखन में अभिव्यक्त होता रहा ।

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