9798895565131: नव आलोक

Sinopsis

कवि की कलम से: प्रभात की सफलता के बाद यह विचार आया कि एक ऐसे साहित्य की रचना की जाये जिसमें गुंफित हर कविता एक मोती हो, जिसका स्वतंत्र अस्तित्व भी हो, और सारी कवितायें एक शृंखला में गुंफित होने पर एक साधक की आत्म-कथा बन उठे। वही प्रयास यहाँ पुस्तक के माध्यम से प्रस्तुत करने का रहा है। नव आलोक की प्रासंगिकता इस बात से भी है कि यह पुस्तक एक नयी पहल करती हुई दिखती है। मेरे वैयक्तिक जीवन में प्रभात जहाँ सारी कविताओं का संकलन होने से काव्य जीवन के प्रभात के रूप में देखा जा सकता है, नव आलोक काव्य जीवन में एक नई उषा की किरण, एक नया प्रकाश है, एक नई दिशा जिससे नव दशा का निर्माण होगा।

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