प्रेम तथा भक्ति के रसों से सराबोर “स्वर वीथिका”, कुछ चयनित शब्दों के सरस समन्यव का एक प्रयास है ताकि स्वर उनके माध्यम से अपनी एक सुमधुर यात्रा सम्पूर्ण कर सकें। इस पुस्तक का आरम्भ 21 नामों के साथ भगवान श्री गणेश की आराधना में 5 दोहों से की गई है, तत्पश्चात, भगवान शिव की स्तुति उनके दिव्य 108 नामों के साथ की गई है, यह मूलतः भगवान शिव की नामावली ही है, जिसे एक क्रम दिया गया है। पुस्तक में कुछ भजन हैं, कुछ प्रेम और विरह गीत हैं, कुछ संदेशप्रद रचनाएँ हैं तो कुछ बस यूँ ही लिख दी गई हैं। स्वरों का स्वाद बदलने के लिए कुछ गजलें भी हैं, जो कि आशा है कि सभी का ध्यान अवश्य आकृष्ट करेंगी। इस पुस्तक में रचनाओं के माध्यम से उठाए गए विषयों में प्रेम तथा विरह गीतों और भजनों के अतिरिक्त स्वतन्त्रता दिवस, महिला दिवस, ग्रीष्म, वर्षा और बसंत ऋतु, जल संचय, राजनीति, भूख, गरीबी, देहदान, मृत्यु, आत्महत्या, कोरोना, स्वच्छता, विज्ञान और बच्चों से संबन्धित रचनाएँ भी शामिल हैं, आशा है कि ये काव्यांजलि सभी लोगों को पसंद भी आएंगी।
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