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जनरल डिब्बा (Hindi Edition) - Tapa blanda

मीणा, विनोद

 
9798237693867: जनरल डिब्बा (Hindi Edition)

Sinopsis

मुंबई से जयपुर की ओर जाती एक ट्रेन, एक खोई हुई टिकट और जनरल डिब्बे में मिली कुछ अनजान मुलाकातें। आरव के लिए यह सफर शुरुआत में केवल घर लौटने की एक साधारण यात्रा है, लेकिन रघुवीर, सुमित और गोपाल दास से मिलने के बाद परिस्थितियाँ बदलने लगती हैं। एक रहस्यमय नीला बैग, वर्षों पुरानी यादें, एक अधूरी कहानी और अतीत से जुड़ा एक ऐसा सच, जिसे शायद समय ने बहुत लंबे समय तक छिपाकर रखा था, धीरे-धीरे इस सफर को एक रहस्य में बदल देते हैं। आरव को समझ आने लगता है कि इस डिब्बे में हुई हर मुलाकात के पीछे कोई न कोई कारण है और शायद उसका यहाँ पहुँचना भी महज एक संयोग नहीं।

"जनरल डिब्बा" केवल रहस्य और रोमांच की कहानी नहीं, बल्कि रिश्तों, इंतज़ार, बिछड़ने और इंसानियत की भी कहानी है। यह उन यात्रियों की कहानी है, जो कुछ घंटों के लिए एक-दूसरे के साथ सफर करते हैं, अपनी जिंदगी का थोड़ा-सा हिस्सा साझा करते हैं और फिर शायद अलग-अलग रास्तों पर चले जाते हैं। लेकिन कुछ मुलाकातें रास्ते में खत्म नहीं होतीं, वे हमारे भीतर अपनी जगह बना लेती हैं। जैसे-जैसे ट्रेन अपनी मंजिल की ओर बढ़ती है, पुराने सवाल सामने आते हैं, छिपे हुए सच धीरे-धीरे खुलते हैं और एक साधारण सफर कई जिंदगियों की कहानी बन जाता है। क्योंकि कभी-कभी एक टिकट केवल यात्रा का साधन नहीं होती, वह उस कहानी का दरवाज़ा होती है, जिसे पूरा होने का इंतज़ार वर्षों से था।

विनोद मीणा का जन्म 10 अक्टूबर 1995 को जयपुर, राजस्थान के एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ। वर्तमान में वे मुंबई सीमाशुल्क विभाग में कार्यरत हैं। प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ साहित्य और लेखन के प्रति उनकी गहरी रुचि रही है। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार, अर्थशास्त्र तथा अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की है। विभिन्न विषयों का यह अकादमिक अनुभव

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