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9789375434979: Poetry collection 743 (Edition1)

Sinopsis

मैंने 'तवाज़ुन' (संतुलन) की तरफ़ ध्यान रखते हुए कुल मिलाकर इक्कीस कविताएँ लिखीं है। इन कविताओं में, मैंने अतिवाद (इफ़रात) एवं उदारवाद (तफ़रीत) का प्रतिरोध किया, और प्रकाश-छाया, आशा-शंका, क्रिया-प्रतिक्रिया को नपी-तुली अनुपातिकता में साथ-साथ रहने दिया। तवाज़ुन में मेरे शब्दों के चयन, मेरे ठहराव (विराम), और मेरे अंत को निर्देशित किया, मुझे यह याद दिलाते हुए कि अर्थ अति या उदार होने से नहीं बल्कि सामंजस्य (संतुलन) से निकलता है, और कविता, जीवन की तरह, अपना सत्य तब पाती है जब हर भावना को उसका सही वज़न दिया जाता है। इफ़रात-ओ-तफ़रीत इस मुहावरे का अर्थ है संतुलन खो देना-या तो बहुत ज्यादा करना या बहुत कम करना।

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Acerca del autor

महेंद्रकुमार एक कवि हैं जिन्हें विचारशील एकांत ने गढ़ा है। पेशे से सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट है, वे तर्क और भावुकता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं, और ज़मीनी हकीकत से जुड़े रहने के लिए रोज़ाना लिखने का प्रयास करते हैं। सादगी और अकेलेपन में रहते हुए, वे शोर-शराबे या दिखावे के बजाय प्रकृति-पेड़ों, सन्नाटे, बदलते आसमान-के करीब रहना अधिक सार्थक मानते हैं। उनकी कविताएं संतुलन, संयम और आंतरिक ईमानदारी को दर्शाती हैं, जो दिखावे के बजाय सच्चाई को प्राथमिकता देती हैं। एक न्यूनतम जीवनशैली और चिंतनशील मन के साथ, उनके शब्द अवलोकन, दिनचर्या और मानवीय भावनाओं और प्राकृतिक दुनिया के बीच सामंजस्य की निरंतर खोज से पनपते हैं।

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