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कभी धूप कभी छाँव - Tapa blanda

द्राल, कनिका

 
9789372134407: कभी धूप कभी छाँव

Sinopsis

"ज़िंदगी की राहों में,कभी धूप थी, कभी छाँव...हर मोड़ पर एक एहसास,हर कविता में एक दास्तान।" ""कभी धूप कभी छाँव..."" एक भावनात्मक यात्रा है -जहाँ स्मृतियाँ, संवेदनाएँ,और अनकहे जज़्बात शब्दों में साँस लेते हैं। जीवन की उन परछाइयों और उजालों की, जो हर इंसान के अनुभव में कभी न कभी आते हैं। यह काव्य संग्रह प्रेम, पीड़ा, आशा, स्मृति और आत्मचिंतन की परतों को धीरे-धीरे खोलता है। हर कविता एक एहसास है - कभी किसी भूले-बिसरे पल की गूंज, तो कभी किसी अनकही पीड़ा की गहराई।

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Acerca del autor

कनिका द्राल, एक संवेदनशील और सहज अभिव्यक्ति की कवयित्री हैं, जिनकी लेखनी में जीवन की सरलता और भावनाओं की गहराई झलकती है।यह उनका पहला काव्य संग्रह है, जो न केवल उनकी रचनात्मकता का परिचय है, बल्कि एक आत्मीय संवाद का निमंत्रण भी है।उन्हें बचपन से ही कविताओं से गहरा लगाव रहा है। अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोने की कला, उन्हें हमेशा से बहुत पसंद रही है। उनके शिक्षकों ने उनके लेखन की प्रतिभा को शुरू से ही पहचाना और प्रोत्साहित किया, जिससे उनके काव्य यात्रा की शुरुआत हुई। उनकी कविताएँ इंसानी भावनाओं और अनुभवों का आईना हैं, जो पाठकों को एक गहरे जुड़ाव का एहसास कराती हैं।कनिका चाहती हैं कि उनकी कविताएँ लोगों के दिलों को छू सकें, सहानुभूति जगाएँ और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करें।

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