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झरोखा (Edition1st) - Tapa blanda

सरां, आशु

 
9789372133950: झरोखा (Edition1st)

Sinopsis

झरोखा' कवयित्री के दिल की वो खिड़की है जिसे वो किसी के लिए नहीं खोलती। वह चाहती है कोई झाँके तो सही परन्तु समझे ना उन बातों को जिन्हें वह यहाँ छुपा कर रखती है। अपनी बातें, लोगों की बातें, कुछ घर की बातें, कुछ बाहर की बातें। यह सब जब मिल जाती हैं तो कागज़ पर उतर आती हैं। उन्ही कागज़ के पन्नों को समेट कर बनी है यह किताब। क्यूँ बनी है? यह तो शायद मालूम नहीं। लेकिन किसके लिए बनी है? इसका जवाब सरल सा है, आप सब के लिए। पर यहाँ भी एक शर्त है, इन पन्नों को आप कैसे और किस कदर समझते हैं, महसूस करते हैं, यह बुनियादी तौर पर सिर्फ और सिर्फ आप पर निर्भर करता है। तो चलिए देखते हैं, इन पन्नों पर उतरा कौन सा हर्फ़ किस पर कितना असर करता है।

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Acerca del autor

अशप्रीत कौर सरां/आशु सरां, एक बातूनी लड़की जिसे बोलना काफी पसंद है और कभी-कभी चुप हो जाना भी। एक लड़की जिसका जीवन प्रेम से भरा-पूरा रहा है, कभी किसी चीज़ से वंचित नहीं रही। उसकी एक दुनिया है बातों और चुप्पी के बीच में, जहाँ वह खुद को संगीत, कहानियों और कविताओं से रोज़ थोड़ा-थोड़ा भर लेती है। अब आशा करती है की उसकी कविताएँ भी किसी के भीतर जज़्बात पैदा कर दें और किसी के अंदर की कोई कमी भरदें।

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