रुबाइयां (Edition1st) - Tapa blanda

गुप्ता, अंजना

 
9789369537051: रुबाइयां (Edition1st)

Sinopsis

यह पुस्तक मेरे पिता की काव्य प्रतिभा को श्रद्धांजलि है, जो उनके हृदयस्पर्शी शब्दों और गहन चिंतन से तैयार की गई है। इन कविताओं को प्रकाशित करना अपार कृतज्ञता और प्रशंसा की यात्रा रही है। अपनी कविताओं के माध्यम से, उन्होंने उन भावनाओं को कैद किया जो समय से परे गूंजती हैं, और उन्हें दुनिया के साथ साझा करना मेरे लिए सम्मान की बात है। मुझे उम्मीद है कि ये कविताएँ उन्हें पढ़ने वाले सभी लोगों को प्रेरित, सुकून और जुड़ाव देंगी।

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Acerca del autor

यह पुस्तक मेरे पिता, स्वर्गीय श्री बृज नंदन सिंघल, को समर्पित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि है। वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे जो गहनता, प्रेम और साहित्यिक जुनून से भरे हुए थे। इन कविताओं के माध्यम से उन्होंने अपनी भावनाओं, अनुभवों और जीवन-यात्रा को ऐसे शब्दों में व्यक्त किया है जो सदैव प्रासंगिक रहेंगे। हर एक पंक्ति उनकी दुनिया की सुंदरता और जटिलता को दर्शाती है। वे केवल एक प्रतिभाशाली लेखक ही नहीं थे, बल्कि एक महान व्यक्ति और प्रेरणादायक पिता भी थे, जिन्होंने हर किसी के जीवन को छुआ।

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