Artículos relacionados a जब भीगी मा&#...

जब भीगी माटी मन की (Edition1st) - Tapa blanda

बिंदुसार, वैभव

 
9789369532858: जब भीगी माटी मन की (Edition1st)

Sinopsis

जिस प्रकार सूखी पड़ी मट्टी में जब बारिश की फुहार पड़ती है तो एक सौंधी-सी ख़ुशबू जन्म लेती है और वह सुगंध हमारे मन को आनंदित कर देती है, भाव विभोर कर देती है, विचार-शून्य कर देती है। ठीक उसी प्रकार जब मानव मन पर विषयों का प्रभाव पड़ता है तो भावनाएं, छंद का दामन थाम कर कविता का रूप धारण करती हैं ।इस काव्य-संग्रह में बचपन से लेकर आज तक कविताओं की मेरी संपूर्ण यात्रा शामिल है। यह कविताएं वास्तव में मात्र शब्द नहीं है बल्कि बाल मन से युवा मन तक का सफ़रनामा है । इस जीवन के रंग बहुत ख़ूबसूरत हैं और ख़ूबसूरत हैं सारे एहसास। उन्हीं कुछ एहसासों को अल्फ़ाज़ों का लिबास पहना कर आपसे मिलवाने लाया हूं। मुझे आशा है कि ये मुलाक़ात आपको रास आएगी।

"Sinopsis" puede pertenecer a otra edición de este libro.

Acerca del autor

लेखक का जन्म उत्तरप्रदेश के जौनपुर शहर में २३ जुलाई १९९८ को एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ । उन्होंने संगीत विषय में स्नातक तथा स्नातकोत्तर की शिक्षा-दीक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से प्राप्त की। युवावस्था का एक महत्वपूर्ण कालखंड बनारस में व्यतीत होने के कारण इस शहर ने उन्हें अपना-सा बना लिया। वर्तमान समय में आप केंद्रीय विद्यालय एन.टी.पी.सी. रिहादनगर में संगीत शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं।

"Sobre este título" puede pertenecer a otra edición de este libro.