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सैन समाज का गौरवशाली इतिहास - Tapa blanda

Ashodhiya, Anand Kumar

 
9789356550315: सैन समाज का गौरवशाली इतिहास

Sinopsis

सैन समाज का गौरवशाली इतिहास

- न्याय, सेवा और भारतीय सभ्यता के अदृश्य स्तंभों का पुनर्पाठ

"सैन समाज का गौरवशाली इतिहास" किसी एक समुदाय का संकीर्ण इतिहास नहीं, बल्कि भारतीय सामाजिक संरचना के उन मूल स्तंभों की खोज है जिन्हें इतिहास ने लंबे समय तक हाशिये पर रखा। यह पुस्तक उस समाज की सभ्यतागत यात्रा को सामने लाती है, जिसकी पहचान केवल पेशे से नहीं, बल्कि न्याय, गोपनीयता, सेवा, शल्य-ज्ञान और नैतिक उत्तरदायित्व से बनी।

प्राचीन भारत से आरंभ होकर यह कृति उस युग को उद्घाटित करती है जब समाज की प्रतिष्ठा शक्ति से नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण आचरण से निर्धारित होती थी। चंद्रवंशी-क्षत्रिय परंपरा, महापद्मनंद का ऐतिहासिक प्रसंग, मौर्यकालीन राज्यदर्शन तथा अशोक के शस्त्र से धम्म तक के रूपांतरण में नाई/सैन समाज की भूमिका को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक स्पष्ट करती है कि नाई केवल सेवा-कर्मी नहीं थे, बल्कि राजकीय विश्वास, चिकित्सा-ज्ञान और सामाजिक संतुलन के वाहक थे।

मध्यकालीन भारत में यह यात्रा संत शिरोमणि सेन जी महाराज की भक्ति-परंपरा तक पहुँचती है, जहाँ सेवा आध्यात्मिक चेतना में रूपांतरित होती है। खालसा परंपरा में भाई साहिब सिंह की ऐतिहासिक उपस्थिति यह दर्शाती है कि सैन समाज केवल सामाजिक ही नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण की प्रक्रिया में भी सक्रिय भागीदार रहा है। औपनिवेशिक काल में पहचान के विघटन, जातीय वर्गीकरण और सामाजिक अवमूल्यन की प्रक्रिया को यह पुस्तक तथ्यपरक ढंग से उजागर करती है।

स्वतंत्र भारत में सैन समाज की यात्रा-संघर्ष से पुनर्निर्माण तक-शिक्षा, प्रशासन, न्याय-सेवा और सार्वजनिक जीवन में उभरती उपस्थिति के साथ प्रस्तुत की गई है। राज्य-वार नामों की विविधता, आंतरिक सामाजिक संरचना, गोत्र परंपरा

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Acerca del autor

Anand Kumar Ashodhiya
Poet - Author - Cultural Envoy

A former Warrant Officer of the Indian Air Force with 32 years of distinguished service, Anand Kumar Ashodhiya combines the discipline of a soldier with the sensitivity of a poet. Known in Haryana's literary world as Kavi Anand Shahpur, he has written extensively in Hindi and Haryanvi on themes of valor, devotion, and cultural heritage. His literary imprint Avikavani Publishers is dedicated to preserving India's folk and classical traditions through modern expression. He lives in Mumbai, India.

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