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चलो कुछ जाग जाएं - Tapa blanda

 
9789354581526: चलो कुछ जाग जाएं

Sinopsis

अभी भी वक़्त है
कुछ बिगड़ा नहीं है अभी भी
चलो कुछ जाग जाएं

अगर सोते रहे अभी भी
तो हो सकता है कि कभी संभला ना जाये
इसलिए
चलो कुछ जाग जाएं

बहुत हो चुकी देर
जागने में
हो गई दोपहर
चलो कुछ जाग जाएं

यूँ ही चलता रहा अगर,
सफ़र ख़त्म हो जाएगा
बिना जागे ही
इसलिए
चलो कुछ जाग जाएं

तुम जागे तभी दूसरों को भी
जगा पाओगे
सोते रहे अगर
तो कभी संभल न पाओगे
इसलिए
चलो कुछ जाग जाएं

रास आता है बड़ा
सोते रहना
बस सोते ही चले जाना
पर अब वक़्त है कि
चलो कुछ जाग जाएं
ये पुस्तक याद दिलाती है एक एहसास कि जीत तब तक़ अधूरी है जब तक सब साथ न हों।

"Sinopsis" puede pertenecer a otra edición de este libro.