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Gaban (With Editor Note) - Tapa dura

Premchand

 
9788199290389: Gaban (With Editor Note)

Sinopsis

प्रेमचंद का उपन्यास 'गबन' भारतीय समाज में नैतिकता, लालच और सम्मान की जटिल परिभाषाओं को गहराई से उजागर करता है। यह कहानी है रमेश और जालपा की; एक ऐसे दंपत्ति की जो वैभव और प्रतिष्ठा की चाह में धीरे-धीरे नैतिक पतन की ओर बढ़ते हैं। जालपा आभूषणों के मोह में बंधी है, और रमेश अपनी पत्नी को प्रसन्न करने के लिए झूठ और कर्ज के दलदल में फंसता चला जाता है। 'गबन' केवल एक व्यक्ति की त्रुटि की कथा नहीं है, बल्कि उस समाज का दर्पण है जहाँ बाहरी चमक-दमक के पीछे मानवीय मूल्यों का क्षय होता जा रहा है। प्रेमचंद की लेखनी इस उपन्यास को एक कालजयी सामाजिक दस्तावेज़ बना देती है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना अपने समय में था।

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Acerca del autor

प्रेमचंद (1880-1936) हिंदी-उर्दू साहित्य के महानतम उपन्यासकार और कथाकार माने जाते हैं। उन्होंने किसानों, मजदूरों और आम जनता के संघर्ष को अपनी कहानियों और उपन्यासों में जीवंत किया। सामाजिक यथार्थवाद, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को साहित्य में स्थान देकर उन्होंने हिंदी साहित्य को नई दिशा दी।

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